आयुष्मान भारत योजना :
रियलिटी रिपोर्ट :
दैनिक भास्कर 28 जनवरी 2019
250 प्रकार के इलाज सिर्फ सरकारी अस्पताल में मरीज ले सकते हैं। जरूरतमंद मरीजों का ₹500000 तक का बड़े अस्पतालों में बेहतर इलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लांच किया था। हकीकत में निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज सही ढंग से शुरू नहीं हो सका है । ज्यादातर लोगों को पता नहीं कि किस बीमारी का इलाज निजी अस्पताल में होगा और किसका सरकारी में । इसके चलते प्रदेश के जरूरतमंद लोग धक्के खा रहे हैं । प्रदेश में ऐसे अनेक केस सामने आए हैं जिनमें पता चला है कि लोगों को निजी अस्पतालों में परेशान होना पड़ रहा है । मरीजों का कहना है कि वह निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाते हैं तो लौटा दिया जाता है। मरीजों की शिकायत पर भास्कर ने गत दिनों निजी अस्पतालों में योजना की पड़ताल की । पता चला कि कुछ बड़े निजी अस्पताल को छोड़कर अन्य अस्पतालों में आयुष्मान भारत चालू नहीं हुई है । वहीं, जितने अस्पतालों ने आवेदन किया था उनमें खामियों के चलते अनेक को अप्रूवल नहीं दी गई है। 1370 तरह के मुफ्त इलाज का लाभ पैनल में शामिल प्राइवेट अस्पतालों से मरीज ले सकते हैं ,जबकि 250 प्रकार के इलाज सिर्फ सरकारी अस्पताल में मरीज करा सकते हैं । निजी अस्पतालों के डॉक्टरों का मानना है कि पेमेंट के लिए डेढ़ से 2 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है । वहीं योजना के जिला मैनेजर का सोहन क् कहना है कि पेमेंट 15 दिन में हो जाती है । अगर फिर भी किसी अस्पताल की रूकती है तो उसमें या तो कोई गलत पैकेज सेलेक्ट किया गया होता है या फिर डॉक्यूमेंट गलत हो सकते हैं।
आयुष्मान भारत योजना:
250 प्रकार के इलाज सिर्फ सरकारी अस्पताल में मरीज ले सकते हैं ।
योजना में यहां आ रही परेशानी :
** 276 बीमारियों को रिजर्व पैकेज में शामिल किया है। यानी जो बीमारियां रिजर्व पैकेज में शामिल हैं बीमारियां रिजर्व पैकेज में शामिल हैं उनका इलाज सरकारी अस्पताल में होगा । इस कारण कोई खास फायदा नहीं हो रहा है । इन बीमारियों का इलाज निजी अस्पतालों में नहीं है।
** सोनीपत के 3 बड़े निजी अस्पतालों ने योजना से जुड़ने से किनारा कर लिया है । कारण इन अस्पताल के मालिकों को सर्जरी केे रेट काफी कम लगे ।
** निजी अस्पतालों को गोल्डन कार्ड बनाने की ट्रेनिंग पूरी तरह से नहीं दी गई। अस्पताल संचालकों का कहना है कि सरकार के नियम काफी सख्त व ज्यादा हैं। पेमेंट के लिए डेढ़ से 2 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है । कई बार जो रिपोर्ट और पैकेज बनाकर भेज देते हैं, वह रिजेक्ट हो जाते हैं ।
** गाल ब्लैडर समेत रूटीन के ऑपरेशन के लिए निजी अस्पतालों को योजना के तहत अधिकृत नहीं किया है। लोग आकर कहते हैं कि 500000 तक सभी इलाज निशुल्क हैं ।
** सरकारी अस्पतालों में होने वाले ट्रीटमेंट को प्राइवेट अस्पतालों में शामिल नहीं किया है । इसके अलावा जो ट्रीटमेंट प्राइवेट अस्पतालों में होता है उसे सरकारी अस्पतालों में शामिल नहीं किया गया।
** स्वास्थ्य विभाग ने प्रचार तक नहीं किया कि कौन कौन सा इलाज सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस मिलेगा
**आईएमए का कहना है कि अभी तक उनके पास इलाज के लिए मरीज नहीं पहुंच रहे हैं । इसका बड़ा कारण योजना में बीमारियों के रिजर्व पैकेज का किया किया गया प्रावधान है । गंभीर बीमारी का इलाज किस अस्पताल में होगा यह क्लियर नहीं । कॉरपोरेट अस्पतालों में तो स्टाफ हैं ,छोटे अस्पतालों के डॉक्टरों को क्लर्की करनी होगी । जिस अस्पताल में भोजन की व्यवस्था नहीं है वहां परेशानी है । इलाज के पैकेज में सब कुछ करना है जो संभव नहीं है।
रियलिटी रिपोर्ट :
दैनिक भास्कर 28 जनवरी 2019
250 प्रकार के इलाज सिर्फ सरकारी अस्पताल में मरीज ले सकते हैं। जरूरतमंद मरीजों का ₹500000 तक का बड़े अस्पतालों में बेहतर इलाज के लिए आयुष्मान भारत योजना को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लांच किया था। हकीकत में निजी अस्पतालों में मरीजों का इलाज सही ढंग से शुरू नहीं हो सका है । ज्यादातर लोगों को पता नहीं कि किस बीमारी का इलाज निजी अस्पताल में होगा और किसका सरकारी में । इसके चलते प्रदेश के जरूरतमंद लोग धक्के खा रहे हैं । प्रदेश में ऐसे अनेक केस सामने आए हैं जिनमें पता चला है कि लोगों को निजी अस्पतालों में परेशान होना पड़ रहा है । मरीजों का कहना है कि वह निजी अस्पतालों में इलाज के लिए जाते हैं तो लौटा दिया जाता है। मरीजों की शिकायत पर भास्कर ने गत दिनों निजी अस्पतालों में योजना की पड़ताल की । पता चला कि कुछ बड़े निजी अस्पताल को छोड़कर अन्य अस्पतालों में आयुष्मान भारत चालू नहीं हुई है । वहीं, जितने अस्पतालों ने आवेदन किया था उनमें खामियों के चलते अनेक को अप्रूवल नहीं दी गई है। 1370 तरह के मुफ्त इलाज का लाभ पैनल में शामिल प्राइवेट अस्पतालों से मरीज ले सकते हैं ,जबकि 250 प्रकार के इलाज सिर्फ सरकारी अस्पताल में मरीज करा सकते हैं । निजी अस्पतालों के डॉक्टरों का मानना है कि पेमेंट के लिए डेढ़ से 2 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है । वहीं योजना के जिला मैनेजर का सोहन क् कहना है कि पेमेंट 15 दिन में हो जाती है । अगर फिर भी किसी अस्पताल की रूकती है तो उसमें या तो कोई गलत पैकेज सेलेक्ट किया गया होता है या फिर डॉक्यूमेंट गलत हो सकते हैं।
आयुष्मान भारत योजना:
250 प्रकार के इलाज सिर्फ सरकारी अस्पताल में मरीज ले सकते हैं ।
योजना में यहां आ रही परेशानी :
** 276 बीमारियों को रिजर्व पैकेज में शामिल किया है। यानी जो बीमारियां रिजर्व पैकेज में शामिल हैं बीमारियां रिजर्व पैकेज में शामिल हैं उनका इलाज सरकारी अस्पताल में होगा । इस कारण कोई खास फायदा नहीं हो रहा है । इन बीमारियों का इलाज निजी अस्पतालों में नहीं है।
** सोनीपत के 3 बड़े निजी अस्पतालों ने योजना से जुड़ने से किनारा कर लिया है । कारण इन अस्पताल के मालिकों को सर्जरी केे रेट काफी कम लगे ।
** निजी अस्पतालों को गोल्डन कार्ड बनाने की ट्रेनिंग पूरी तरह से नहीं दी गई। अस्पताल संचालकों का कहना है कि सरकार के नियम काफी सख्त व ज्यादा हैं। पेमेंट के लिए डेढ़ से 2 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है । कई बार जो रिपोर्ट और पैकेज बनाकर भेज देते हैं, वह रिजेक्ट हो जाते हैं ।
** गाल ब्लैडर समेत रूटीन के ऑपरेशन के लिए निजी अस्पतालों को योजना के तहत अधिकृत नहीं किया है। लोग आकर कहते हैं कि 500000 तक सभी इलाज निशुल्क हैं ।
** सरकारी अस्पतालों में होने वाले ट्रीटमेंट को प्राइवेट अस्पतालों में शामिल नहीं किया है । इसके अलावा जो ट्रीटमेंट प्राइवेट अस्पतालों में होता है उसे सरकारी अस्पतालों में शामिल नहीं किया गया।
** स्वास्थ्य विभाग ने प्रचार तक नहीं किया कि कौन कौन सा इलाज सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस मिलेगा
**आईएमए का कहना है कि अभी तक उनके पास इलाज के लिए मरीज नहीं पहुंच रहे हैं । इसका बड़ा कारण योजना में बीमारियों के रिजर्व पैकेज का किया किया गया प्रावधान है । गंभीर बीमारी का इलाज किस अस्पताल में होगा यह क्लियर नहीं । कॉरपोरेट अस्पतालों में तो स्टाफ हैं ,छोटे अस्पतालों के डॉक्टरों को क्लर्की करनी होगी । जिस अस्पताल में भोजन की व्यवस्था नहीं है वहां परेशानी है । इलाज के पैकेज में सब कुछ करना है जो संभव नहीं है।
चार उदाहरण जिनमें से-- दो को मिला इलाज , एक को भटकना पड़ा ,एक का कार्ड कार्ड नहीं बना,
1 . घरोड़ा निवासी 80 वर्षीय केशो देवी परिवार के साथ कुछ दिन पहले सिविल सर्जन डॉक्टर डीएन बागड़ी से बीमारी में मदद लेने के लिए आई थी।डॉ बागड़ी ने उनका रिकॉर्ड आयुष्मान योजना में चेक कराया और उनका नाम योजना में शामिल मिलते ही उनका गोल्डन कार्ड बनाया गया । फिर बीते सप्ताह प्रेम अस्पताल में केसर देवी की प्लास्टिक सर्जरी का सफल इलाज हुआ । इसमें अस्पताल को सरकार की ओर से करीब ₹25000 भेजे गए हैं । महिला ने कहा कि उनके लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है ।
2. पानीपत निवासी गौतम कुमार 9 वर्षों से नाक से ठीक प्रकार से सांस नहीं ले पाता था , इस कारण उसको बहुत तकलीफ होती थी । उसने बताया कि नाक से सांस नहीं आने के कारण वह कई सालों से उल्टा लेट कर सोता था,
ताकि नजला अंदर की बजाय बाहर टपकता रहे । उसने बताया कि उसका पिता वेदपाल फैक्ट्री में काम करता है। इस कारण वह ऑपरेशन नहीं करा पा रहा था । उसने एक दिन अपना नाम योजना में चेक किया तो उसका नाम शामिल मिला । उसके बाद उसने गोल्डन कार्ड बनवाकर अग्रसेन अस्पताल में इलाज कराया ।
3. रेवाड़ी के धारूहेड़ा चुंगी स्थिति विराट अस्पताल में कोसली क्षेत्र से एक व्यक्ति गाल ब्लैडर के ऑपरेशन के लिए पहुंचा व्यक्ति ने ने आयुष्मान योजना में उपचार निशुल्क होने की बात कही चिकित्सकों ने उसे बताया कि ऐसे छोटे ऑपरेशन निजी अस्पताल के लिए योजना में शामिल नहीं है
नंबर 4 पूजा बाद की एनआईटी एनआईटी बाद की एनआईटी एनआईटी निवासी मंजू ने बताया कि वह 1 1 माह पहले लिस्ट में अपना नाम देख चुके हैं लेकिन लेकिन अभी तक गोल्डन कार्ड नहीं बना है वह 1 दिन बिक गई में में कार्ड बनवाने गई थी लेकिन भीड़ अधिक होने से कार्ड नहीं बन पाया।
1 . घरोड़ा निवासी 80 वर्षीय केशो देवी परिवार के साथ कुछ दिन पहले सिविल सर्जन डॉक्टर डीएन बागड़ी से बीमारी में मदद लेने के लिए आई थी।डॉ बागड़ी ने उनका रिकॉर्ड आयुष्मान योजना में चेक कराया और उनका नाम योजना में शामिल मिलते ही उनका गोल्डन कार्ड बनाया गया । फिर बीते सप्ताह प्रेम अस्पताल में केसर देवी की प्लास्टिक सर्जरी का सफल इलाज हुआ । इसमें अस्पताल को सरकार की ओर से करीब ₹25000 भेजे गए हैं । महिला ने कहा कि उनके लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है ।
2. पानीपत निवासी गौतम कुमार 9 वर्षों से नाक से ठीक प्रकार से सांस नहीं ले पाता था , इस कारण उसको बहुत तकलीफ होती थी । उसने बताया कि नाक से सांस नहीं आने के कारण वह कई सालों से उल्टा लेट कर सोता था,
ताकि नजला अंदर की बजाय बाहर टपकता रहे । उसने बताया कि उसका पिता वेदपाल फैक्ट्री में काम करता है। इस कारण वह ऑपरेशन नहीं करा पा रहा था । उसने एक दिन अपना नाम योजना में चेक किया तो उसका नाम शामिल मिला । उसके बाद उसने गोल्डन कार्ड बनवाकर अग्रसेन अस्पताल में इलाज कराया ।
3. रेवाड़ी के धारूहेड़ा चुंगी स्थिति विराट अस्पताल में कोसली क्षेत्र से एक व्यक्ति गाल ब्लैडर के ऑपरेशन के लिए पहुंचा व्यक्ति ने ने आयुष्मान योजना में उपचार निशुल्क होने की बात कही चिकित्सकों ने उसे बताया कि ऐसे छोटे ऑपरेशन निजी अस्पताल के लिए योजना में शामिल नहीं है
नंबर 4 पूजा बाद की एनआईटी एनआईटी बाद की एनआईटी एनआईटी निवासी मंजू ने बताया कि वह 1 1 माह पहले लिस्ट में अपना नाम देख चुके हैं लेकिन लेकिन अभी तक गोल्डन कार्ड नहीं बना है वह 1 दिन बिक गई में में कार्ड बनवाने गई थी लेकिन भीड़ अधिक होने से कार्ड नहीं बन पाया।
नारनौल :
यहां 44000 परिवारों को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया है । इसके तहत जिले के छह अस्पतालों को शामिल किया है। इसमें चार निजी और दो सरकारी अस्पताल शामिल हैं। यहां इनमें पात्र लोगों का निशुल्क इलाज शुरू हो चुका है । बता दें कि 10 से अधिक निजी अस्पतालों ने योजना के लिए आवेदन किया था लेकिन 6 ने शर्तें पूरी नहीं की।
यहां 44000 परिवारों को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया है । इसके तहत जिले के छह अस्पतालों को शामिल किया है। इसमें चार निजी और दो सरकारी अस्पताल शामिल हैं। यहां इनमें पात्र लोगों का निशुल्क इलाज शुरू हो चुका है । बता दें कि 10 से अधिक निजी अस्पतालों ने योजना के लिए आवेदन किया था लेकिन 6 ने शर्तें पूरी नहीं की।
जींद:
जिले में अभी तक किसी भी निजी अस्पताल में लाभ पात्र का इलाज नहीं हो पाया है । यहां से 9 अस्पतालों ने आवेदन किया था लेकिन 5 को ही लॉगइन मिला है । जो लाभपात्र पहुंचे उनका सिविल अस्पताल में ही इलाज किया जाता है नहीं तो पीजीआई रेफर किया जाता है । सिविल अस्पताल में 27 लाभ पात्र का इलाज हुआ है।
सोनीपत :
20 निजी अस्पताल पैनल से जुड़े हैं, जबकि छह की फाइल पेंडिंग है । यहां गोल्डन कार्ड 80000 के बनने हैं जबकि बने सिर्फ 6500 के हैं । गोल्डन कार्ड के लिए भी लाइन लग रही है। काउंटर नहीं बढ़ाए गए । अब तक 65 मरीजों की सर्जरी व फिजिशियन से जांच हुई है।
सिरसा :
जिले के 82 हजार परिवार शामिल हैं। 11 बड़े प्राइवेट और 4 सरकारी अस्पतालों को पैनल में लिया है जबकि 20 प्राइवेट अस्पतालों आवेदन किया था। 5000 पात्रों ने कार्ड बनवाए हैं। 51 मरीजों ने पैनल में शामिल विभिन्न अस्पतालों से इलाज लिया है । 14 मरीजों का इलाज सरकारी अस्पताल में संभव हो पाया है । यहां सभी में इलाज शुरू हो चुका है।
जिले में अभी तक किसी भी निजी अस्पताल में लाभ पात्र का इलाज नहीं हो पाया है । यहां से 9 अस्पतालों ने आवेदन किया था लेकिन 5 को ही लॉगइन मिला है । जो लाभपात्र पहुंचे उनका सिविल अस्पताल में ही इलाज किया जाता है नहीं तो पीजीआई रेफर किया जाता है । सिविल अस्पताल में 27 लाभ पात्र का इलाज हुआ है।
सोनीपत :
20 निजी अस्पताल पैनल से जुड़े हैं, जबकि छह की फाइल पेंडिंग है । यहां गोल्डन कार्ड 80000 के बनने हैं जबकि बने सिर्फ 6500 के हैं । गोल्डन कार्ड के लिए भी लाइन लग रही है। काउंटर नहीं बढ़ाए गए । अब तक 65 मरीजों की सर्जरी व फिजिशियन से जांच हुई है।
सिरसा :
जिले के 82 हजार परिवार शामिल हैं। 11 बड़े प्राइवेट और 4 सरकारी अस्पतालों को पैनल में लिया है जबकि 20 प्राइवेट अस्पतालों आवेदन किया था। 5000 पात्रों ने कार्ड बनवाए हैं। 51 मरीजों ने पैनल में शामिल विभिन्न अस्पतालों से इलाज लिया है । 14 मरीजों का इलाज सरकारी अस्पताल में संभव हो पाया है । यहां सभी में इलाज शुरू हो चुका है।
फतेहाबाद
कुल 7 अस्पतालों में युवा योजना लागू हो पाई है। इसमें 4 सरकारी और 3 प्राइवेट अस्पताल हैं । अभी तक प्राइवेट अस्पताल में एक भी व्यक्ति का इलाज नहीं हुआ है ।सरकारी अस्पतालों में 36 लोग उपचार करा चुके हैं।
कुल 7 अस्पतालों में युवा योजना लागू हो पाई है। इसमें 4 सरकारी और 3 प्राइवेट अस्पताल हैं । अभी तक प्राइवेट अस्पताल में एक भी व्यक्ति का इलाज नहीं हुआ है ।सरकारी अस्पतालों में 36 लोग उपचार करा चुके हैं।
फतेहाबाद
कुल 7 अस्पतालों में युवा योजना लागू हो पाई है। इसमें 4 सरकारी और 3 प्राइवेट अस्पताल हैं । अभी तक प्राइवेट अस्पताल में एक भी व्यक्ति का इलाज नहीं हुआ है ।सरकारी अस्पतालों में 36 लोग उपचार करा चुके हैं।
कुल 7 अस्पतालों में युवा योजना लागू हो पाई है। इसमें 4 सरकारी और 3 प्राइवेट अस्पताल हैं । अभी तक प्राइवेट अस्पताल में एक भी व्यक्ति का इलाज नहीं हुआ है ।सरकारी अस्पतालों में 36 लोग उपचार करा चुके हैं।
भिवानी :
चौधरी बंसीलाल सामान्य अस्पताल सहित जिले के अन्य सब डिविजन अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत सुविधा दी जा रही है । प्रदेश में अभी तक सबसे ज्यादा गोल्डन कार्ड भिवानी में 18000 बनाए हैं । यहां जितने अस्पतालों ने आवेदन किया था सभी में इलाज शुरू हो चुका है।
चौधरी बंसीलाल सामान्य अस्पताल सहित जिले के अन्य सब डिविजन अस्पतालों में आयुष्मान योजना के तहत सुविधा दी जा रही है । प्रदेश में अभी तक सबसे ज्यादा गोल्डन कार्ड भिवानी में 18000 बनाए हैं । यहां जितने अस्पतालों ने आवेदन किया था सभी में इलाज शुरू हो चुका है।
पानीपत 135 निजी अस्पताल हैं लेकिन योजना से जुड़ने के लिए मात्र 27 अस्पतालों में लॉगइन किया है।
रेवाड़ी :
रेवाड़ी के 16 अस्पतालों में ऑनलाइन आवेदन किया , लेकिन 12 के रद्द हो गए हो गए रद्द हो गए हो गए , क्योंकि अस्पतालों से फायर सेफ्टी , प्रदूषण समेत कई तरह की एनओसी मांगी गई, एक भी डोकुमेंट कम रहने के चलते आवेदन रद्द किए जा रहे हैं । चार को छोड़कर बाकी किसी भी अस्पताल को पैनल में नहीं जोड़ा गया।
महेंद्रगढ़ 44000 परिवारों को शामिल किया है । 6 अस्पतालों को शामिल किया है। इनमें चार निजी अस्पताल व दो सरकारी अस्पताल शामिल हैं ।
रेवाड़ी के 16 अस्पतालों में ऑनलाइन आवेदन किया , लेकिन 12 के रद्द हो गए हो गए रद्द हो गए हो गए , क्योंकि अस्पतालों से फायर सेफ्टी , प्रदूषण समेत कई तरह की एनओसी मांगी गई, एक भी डोकुमेंट कम रहने के चलते आवेदन रद्द किए जा रहे हैं । चार को छोड़कर बाकी किसी भी अस्पताल को पैनल में नहीं जोड़ा गया।
महेंद्रगढ़ 44000 परिवारों को शामिल किया है । 6 अस्पतालों को शामिल किया है। इनमें चार निजी अस्पताल व दो सरकारी अस्पताल शामिल हैं ।
करनाल :
20 प्राइवेट और 4 सरकारी अस्पतालों को लॉगइन मिला है । दो नए प्राइवेट अस्पतालों का अप्रूवल के लिए नामांकन किया है । करीब 30 अस्पतालों ने अप्रूवल के लिए अप्लाई किया था। 24 लोगों को सुविधाएं मिल रही हैं।
20 प्राइवेट और 4 सरकारी अस्पतालों को लॉगइन मिला है । दो नए प्राइवेट अस्पतालों का अप्रूवल के लिए नामांकन किया है । करीब 30 अस्पतालों ने अप्रूवल के लिए अप्लाई किया था। 24 लोगों को सुविधाएं मिल रही हैं।
हिसार :आयुष्मान योजना
एक लाख लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलना है । करीब 8000 लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। 40 के करीब निजी अस्पतालों ने आवेदन किया था जिस में में से 13 को जोड़ा गया है।
फरीदाबाद :
करीब 6:30 लाख लोगों के गोल्डन कार्ड बनने हैं पर सिर्फ 5500 लोगों लोगों की पहचान हो पाई है और इतने ही कार्ड बन सके हैं । स्वास्थ्य विभाग ने 2 माह में सिर्फ 11 निजी अस्पतालों को ही जोड़ा है।
प्रस्तुति
डॉ रणबीर सिंह दहिया
जन स्वास्थ्य अभियान ,
हरियाणा
एक लाख लाभार्थियों को योजना का लाभ मिलना है । करीब 8000 लाभार्थियों को गोल्डन कार्ड बन चुके हैं। 40 के करीब निजी अस्पतालों ने आवेदन किया था जिस में में से 13 को जोड़ा गया है।
फरीदाबाद :
करीब 6:30 लाख लोगों के गोल्डन कार्ड बनने हैं पर सिर्फ 5500 लोगों लोगों की पहचान हो पाई है और इतने ही कार्ड बन सके हैं । स्वास्थ्य विभाग ने 2 माह में सिर्फ 11 निजी अस्पतालों को ही जोड़ा है।
प्रस्तुति
डॉ रणबीर सिंह दहिया
जन स्वास्थ्य अभियान ,
हरियाणा
No comments:
Post a Comment