सिरसा :आयुष्मान भारत
जिले के 82 हजार परिवार शामिल हैं। 11 बड़े प्राइवेट और 4 सरकारी अस्पतालों को पैनल में लिया है जबकि 20 प्राइवेट अस्पतालों आवेदन किया था। 5000 पात्रों ने कार्ड बनवाए हैं। 51 मरीजों ने पैनल में शामिल विभिन्न अस्पतालों से इलाज लिया है । 14 मरीजों का इलाज सरकारी अस्पताल में संभव हो पाया है । यहां सभी में इलाज शुरू हो चुका है।
सोनीपत :आयुष्मान भारत
20 निजी अस्पताल पैनल से जुड़े हैं, जबकि छह की फाइल पेंडिंग है । यहां गोल्डन कार्ड 80000 के बनने हैं जबकि बने सिर्फ 6500 के हैं । गोल्डन कार्ड के लिए भी लाइन लग रही है। काउंटर नहीं बढ़ाए गए । अब तक 65 मरीजों की सर्जरी व फिजिशियन से जांच हुई है।
जींद:आयुष्मान भारत
जिले में अभी तक किसी भी निजी अस्पताल में लाभ पात्र का इलाज नहीं हो पाया है । यहां से 9 अस्पतालों ने आवेदन किया था लेकिन 5 को ही लॉगइन मिला है । जो लाभपात्र पहुंचे उनका सिविल अस्पताल में ही इलाज किया जाता है नहीं तो पीजीआई रेफर किया जाता है । सिविल अस्पताल में 27 लाभ पात्र का इलाज हुआ है।
नारनौल :आयुष्मान भारत
यहां 44000 परिवारों को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया है । इसके तहत जिले के छह अस्पतालों को शामिल किया है। इसमें चार निजी और दो सरकारी अस्पताल शामिल हैं। यहां इनमें पात्र लोगों का निशुल्क इलाज शुरू हो चुका है । बता दें कि 10 से अधिक निजी अस्पतालों ने योजना के लिए आवेदन किया था लेकिन 6 ने शर्तें पूरी नहीं की।
जिले के 82 हजार परिवार शामिल हैं। 11 बड़े प्राइवेट और 4 सरकारी अस्पतालों को पैनल में लिया है जबकि 20 प्राइवेट अस्पतालों आवेदन किया था। 5000 पात्रों ने कार्ड बनवाए हैं। 51 मरीजों ने पैनल में शामिल विभिन्न अस्पतालों से इलाज लिया है । 14 मरीजों का इलाज सरकारी अस्पताल में संभव हो पाया है । यहां सभी में इलाज शुरू हो चुका है।
सोनीपत :आयुष्मान भारत
20 निजी अस्पताल पैनल से जुड़े हैं, जबकि छह की फाइल पेंडिंग है । यहां गोल्डन कार्ड 80000 के बनने हैं जबकि बने सिर्फ 6500 के हैं । गोल्डन कार्ड के लिए भी लाइन लग रही है। काउंटर नहीं बढ़ाए गए । अब तक 65 मरीजों की सर्जरी व फिजिशियन से जांच हुई है।
जींद:आयुष्मान भारत
जिले में अभी तक किसी भी निजी अस्पताल में लाभ पात्र का इलाज नहीं हो पाया है । यहां से 9 अस्पतालों ने आवेदन किया था लेकिन 5 को ही लॉगइन मिला है । जो लाभपात्र पहुंचे उनका सिविल अस्पताल में ही इलाज किया जाता है नहीं तो पीजीआई रेफर किया जाता है । सिविल अस्पताल में 27 लाभ पात्र का इलाज हुआ है।
नारनौल :आयुष्मान भारत
यहां 44000 परिवारों को आयुष्मान भारत योजना में शामिल किया है । इसके तहत जिले के छह अस्पतालों को शामिल किया है। इसमें चार निजी और दो सरकारी अस्पताल शामिल हैं। यहां इनमें पात्र लोगों का निशुल्क इलाज शुरू हो चुका है । बता दें कि 10 से अधिक निजी अस्पतालों ने योजना के लिए आवेदन किया था लेकिन 6 ने शर्तें पूरी नहीं की।
को सर्जरी केे रेट काफी कम लगे ।
** निजी अस्पतालों को गोल्डन कार्ड बनाने की ट्रेनिंग पूरी तरह से नहीं दी गई। अस्पताल संचालकों का कहना है कि सरकार के नियम काफी सख्त व ज्यादा हैं। पेमेंट के लिए डेढ़ से 2 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है । कई बार जो रिपोर्ट और पैकेज बनाकर भेज देते हैं, वह रिजेक्ट हो जाते हैं ।
** गाल ब्लैडर समेत रूटीन के ऑपरेशन के लिए निजी अस्पतालों को योजना के तहत अधिकृत नहीं किया है। लोग आकर कहते हैं कि 500000 तक सभी इलाज निशुल्क हैं ।
** सरकारी अस्पतालों में होने वाले ट्रीटमेंट को प्राइवेट अस्पतालों में शामिल नहीं किया है । इसके अलावा जो ट्रीटमेंट प्राइवेट अस्पतालों में होता है उसे सरकारी अस्पतालों में शामिल नहीं किया गया।
** स्वास्थ्य विभाग ने प्रचार तक नहीं किया कि कौन कौन सा इलाज सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस मिलेगा
**आईएमए का कहना है कि अभी तक उनके पास इलाज के लिए मरीज नहीं पहुंच रहे हैं । इसका बड़ा कारण योजना में बीमारियों के रिजर्व पैकेज का किया किया गया प्रावधान है । गंभीर बीमारी का इलाज किस अस्पताल में होगा यह क्लियर नहीं । कॉरपोरेट अस्पतालों में तो स्टाफ हैं ,छोटे अस्पतालों के डॉक्टरों को क्लर्की करनी होगी । जिस अस्पताल में भोजन की व्यवस्था नहीं है वहां परेशानी है । इलाज के पैकेज में सब कुछ करना है जो संभव नहीं है।
** निजी अस्पतालों को गोल्डन कार्ड बनाने की ट्रेनिंग पूरी तरह से नहीं दी गई। अस्पताल संचालकों का कहना है कि सरकार के नियम काफी सख्त व ज्यादा हैं। पेमेंट के लिए डेढ़ से 2 महीने तक इंतजार करना पड़ रहा है । कई बार जो रिपोर्ट और पैकेज बनाकर भेज देते हैं, वह रिजेक्ट हो जाते हैं ।
** गाल ब्लैडर समेत रूटीन के ऑपरेशन के लिए निजी अस्पतालों को योजना के तहत अधिकृत नहीं किया है। लोग आकर कहते हैं कि 500000 तक सभी इलाज निशुल्क हैं ।
** सरकारी अस्पतालों में होने वाले ट्रीटमेंट को प्राइवेट अस्पतालों में शामिल नहीं किया है । इसके अलावा जो ट्रीटमेंट प्राइवेट अस्पतालों में होता है उसे सरकारी अस्पतालों में शामिल नहीं किया गया।
** स्वास्थ्य विभाग ने प्रचार तक नहीं किया कि कौन कौन सा इलाज सरकारी और निजी अस्पतालों में कैशलेस मिलेगा
**आईएमए का कहना है कि अभी तक उनके पास इलाज के लिए मरीज नहीं पहुंच रहे हैं । इसका बड़ा कारण योजना में बीमारियों के रिजर्व पैकेज का किया किया गया प्रावधान है । गंभीर बीमारी का इलाज किस अस्पताल में होगा यह क्लियर नहीं । कॉरपोरेट अस्पतालों में तो स्टाफ हैं ,छोटे अस्पतालों के डॉक्टरों को क्लर्की करनी होगी । जिस अस्पताल में भोजन की व्यवस्था नहीं है वहां परेशानी है । इलाज के पैकेज में सब कुछ करना है जो संभव नहीं है।
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