Friday, June 19, 2020

हरियाणा की सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाएं
हरयाणा सिविल मेडिकल सर्विसेज
सिविल अस्पताल --68---100 से 500 बिस्तर हो सकते हैं |
29 +3 , 34 +3 , 50 , 58 , 68
सब सेंटर--2650(3440 )  , प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र--531(573 )  , सामुदायिक केंद्र--128(143 )
पोली क्लिनिक्स --11 ,अर्बन हेल्थ सेंटर्स --11 , डिस्पेंसरीज --4
ESIC डिस्पेंसरीज --67
तथाकथित RMP ग्रामीण इलाकों में जो अलोपैथी की प्रैक्टिस करते हैं
11 सरकारी या प्राइवेट मेडिकल कॉलेज
पीजीआइएमएस रोहतक--2050 बिस्तर के साथ

In CM's dist,Karnal hospitals make do with half doctor strength
Health institutions in Karnal
1 Civil Hospital
2 Subdivisional hospitals
5 CHCs
14 PHCs
3 Dispensaries
1 in jail
1 Polyclinic
Sanctioned posts of doctors 154
Vacancies 87
Health Centres without doctors:
Taraori, Uplana,Padhana,Samana bahu,Gularpur,Padha,Gagsina,Gudha,Kunj pura,Ramba.,Mirghan
Biana
Postpartam unit of Civil Hospital
Civil Hospital has 42 sanctioned posts
Only 22 doctors are there
Nilokheri subdivisional hospital four of the 11 posts are vacant.
In Gharaunda 5 of the 6 sanctioned posts are vacant.
Source (The Tribune, dated 25 Nov.2019)
As per the central govt. recommendations there should be a surgeon, physician, paediatrician and gynecologist in each CHC.
One Chawla Medical College is there
Another Health University is also being planned.
One Medical College at each district level is promised .
The primary and secondary level health services are collapsing because of wrong policies of the successive Govts.


पीजीआईएमएस रोहतक के रेडियो डाइग्नोसिस विभाग में
18.8.2018 को 150 xray दाखिल मरीजों के और 863 ओपीडी के मरीजों के किये गए।
19.8.2018 को एतवार के दिन 34 दाखिल मरीजों के और 228 ओपीडी मरीजों के किये गए।
20.8.2018 को 168 दाखिल मरीजों के और 992 ओपीडी मरीजों के xray किये गए।
21.8.2018 को 128 xray दाखिल मरीजों के और 997 ओपीडी मरीजों के किये गए।
इसके अलावा सीटी स्कैन और mri और अल्ट्रासाउंड अलग।
फैकल्टी बहुत कम
आज के दिन 7 हैं 3..4 महीने पहले तक 5 ही थी
जब mri , ct स्कैन , अल्ट्रासाउंड नहीं आये थे तब विभाग में फैकल्टी 9 थी
वर्कलोड बहुत ज्यादा है फैकल्टी बहुत कम है

मरीजों की परेशानियां तो बढ़ेंगी ही।

पीजीआईएमएस रोहतक के रेडियो डाइग्नोसिस विभाग में
18.8.2018 को 15 अल्ट्रासाउंड दाखिल मरीजों के और 428 ओपीडी के मरीजों के किये गए।
19.8.2018 को एतवार के दिन 18 दाखिल मरीजों के और 166 ओपीडी मरीजों के किये गए।
20.8.2018 को 77 दाखिल मरीजों के और 672 ओपीडी मरीजों के  अल्ट्रासाउंड किये गए।
21.8.2018 को 35 अल्ट्रासाउंड दाखिल मरीजों के और 521ओपीडी मरीजों के किये गए।
इसके अलावा सीटी स्कैन और mri और xray अलग।
फैकल्टी बहुत कम
आज के दिन 7 हैं 3..4 महीने पहले तक 5 ही थी
जब mri , ct स्कैन , अल्ट्रासाउंड नहीं आये थे तब विभाग में फैकल्टी 9 थी
वर्कलोड बहुत ज्यादा है फैकल्टी बहुत कम है
इसमें स्त्री रोग विभाग में किये जाने वाले अल्ट्रासाउंड शामिल नहीं हैं
20 अल्ट्रासाउंड स्त्री रोग विभाग की ओपीडी में रोजाना किये जाते हैं वह अलग
4..4 घंटे से भी ज्यादा का इंतजार करना पड़ता है। स्त्री रोग के दाखिल मरीजों को।
यहाँ अल्ट्रसाउंड 50 रूपये में हो जाता है जबकि बाहर प्राइवेट में 700 से कम में नहीं होता।
मरीजों की परेशानियां तो बढ़ेंगी ही।
मशीनें तो और भी आने की बात कही जा रही है मगर फैकल्टी की संख्या क्यों नहीं बढ़ाई जा रही ?? बड़ा सवाल है

पी जी आई चंडीगढ़ और पी जी आई रोहतक के दो हजार चौदह - दो हजार पन्द्रह के कुछ मशलों पर देखने पर कुछ सवाल उठते हैं किसी के भी मन में कि पी जी आई रोहतक का वर्क लोड ज्यादा मगर यहाँ की स्टाफ की संख्या कम और फैकल्टी के ग्रेड्स भी कम। सरकार को इस तरफ ध्यान देना चाहिए। पिछले 3 साल में वर्क लोड और भी बढ़ा है।
2014--15 के कुछ आंकड़े***
1..दाखिल मरीज
रोहतक .107383                 चंडीगढ़ .82184
2..कुल डिलीवरी
रोहतक *9683                  चंडीगढ़ *5824
3..ऑपेरशन
रोहतक पी जी आई एम एस ..195355       पी जी आई चंडीगढ़ ..190404
 4..कुल बिस्तर
रोहतक पी जी आई एम एस --1710       चंडीगढ़  पी जी आई—1948
MBBS 250 STUDENTS                              NO
PGIMS के लिए सुझाव 
1 मूलभूत जरूरतों पर ज्यादा धयान देने की जरूरत है --पट्टी ,सुईं , कॉटन , दवाई , आदि आदि 
2. इलाज की गुणवत्ता पर ज्यादा धयान दिए जाने की जरूरत है। 
3. यह जनरल अस्पताल न होकर एक रेफेरल अस्पताल हो aiims की  तरह 
4. 250 ऍम बी बी एस की कक्षा के लिए उचित इंफ्रास्ट्रक्चर और टीचिंग फैकल्टी की जरूरत है। 
5. यह सब करने के लिए बजट का बढ़ाया जाना बहुत जरूरी है। 
6. Ambitious होना तो ठीक है मगर over ambitious होना ठीक नहीं है। 
7 कार्यरत फैकल्टी में सौहार्दपूर्ण वातावरण बनाने की जरूरत है।  राज्य की राजनीती से मेडिकल हमेशा से ही प्रभावित रहा है। 
8. पैरामेडिकल स्टाफ और  नर्सिस की संख्या जरूरत के हिसाब से काफी कम है।  3100 नर्सिस की जरूरत है मगर हैं 1000 के लगभग 
9.  PPE मोड को बंद करके सीधा सरकारी कंट्रोल से चलें विभाग और लैब। 
10. ज्यादा पारदर्शिता के साथ काम किये जायेंगे तभी जनता का विश्वास फिर से जीता जा सकता है।  







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