Friday, June 9, 2023

पुरानी बीमारियों की वापसी

 पुरानी बीमारियों की वापसी और नई बीमारियों का उद्भव

       एक पीढ़ी पहले जन स्वास्थ्य के अगुवा लोगों की यह आम राय बन गई थी कि संक्रामक रोगों को सैद्धांतिक रूप से परास्त किया जा चुका है और अब जमाना लद गया जब ये मृत्यु दर और बीमारियों के महत्वपूर्ण कारक हुआ करते थे। मेडिकल छात्रों को कहा जाता था कि ये संक्रामक रोगों में स्पेसलिस्ट होने से बचें क्योंकि यह विषय अब मृतप्राय है। वस्तुतः हॉवर्ड स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ का महामारी विभाग भी अब कैंसर और हृदय रोग तक ही सीमित हो गया।
      यह लोग गलत थे । 1961 में, सातवीं बार हैजा  पूरे इंडोनेशिया में महामारी की तरह फैला, 1970 में, यह अफ्रीका पहुंचा और 90 के दशक में दक्षिण अमरीका पहुंच गया। कुछ वर्षों तक शांत रहने के बाद मलेरिया प्रतिशोध लेने  वापस आया । दुनिया के बहुत से हिस्सों में टीबी इतना बढ़ गया कि यह मृत्यु का एक प्रमुख कारण बन चुका है। 1976 में, अमरीका के फिलाडेल्फिया में सैनिकों के अधिवेशन में सैनिकों वाली बीमारी सामने आई। पूर्वोत्तर में लाइम बीमारी फैली, मिल्वेकी  में क्रिप्टोस्पोरीडिओसिस ने चार लाख लोगों को प्रभावित किया। टॉक्सिक शौक सिंड्रोम , क्रोनिक फैटिग सिण्ड्रोम, लास्मा बुखार, इबोला, वेनेजुएला मस्तिष्क ज्वर ,क्रोमियाई-कोंगो मस्तिष्क ज्वर, अर्जेटीन मस्तिष्क ज्वर,  हान्ता वायरस, और और विशेष रूप से एड्स जैसी नई बीमारियों के साथ हमारा सामना हुआ। महामारी के संकरण के बारे में दिया गया सिद्धांत भयावह रूप से गलत था। संक्रामक रोग हर कहीं स्वास्थ्य की बड़ी समस्या बन गया है।

रोग उत्पत्ति की विचारधाराएं
Theories of Disease Causation

रोग उत्पत्ति की विचारधाराएं किसी समय या काल के लोगों के ज्ञान  पर आधारित थीं।
जिस प्रकार मनुष्य का ज्ञान बढ़ता गया इन रोग उत्पत्ति कारकों की श्रृंखला विस्तृत होती चली गई। समय के विकास क्रम में विचारधाराओं को निम्न प्रकार रखा जा सकता है:--
1)
दैवीय प्रकोप विचारधारा (Supernatural Theory)
2) पॉश्चर का जीवाणु सिद्धांत (Pasteur's Germ Theory)
3) जैवचिकित्सकीय विचारधारा (Biomedical Theory)
4) बहु कारण विचारधारा(Multi Factorial Theory)
5) मनो-सामाजिक विचारधारा(Psycho
Social Theory)

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